Vrindavan Banke Bihari Temple Toshakhana Dispute: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर तोशाखाना विवादVrindavan Banke Bihari Temple Toshakhana Dispute: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर तोशाखाना विवाद

Vrindavan Banke Bihari Temple Toshakhana Dispute: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर तोशाखाना विवाद

 

विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर के तोशाखाना (खजाने के कमरे) के खुलने के बाद उपजे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर प्रशासन द्वारा वर्षों से बंद पड़े तोशाखाने को खोला गया था, लेकिन भक्तों और स्थानीय लोगों की उम्मीदों के विपरीत वहां से अरबों रुपये मूल्य के सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात और संपत्ति के महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं मिले। इस अप्रत्याशित परिणाम ने न केवल ब्रजवासी संत समाज को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सनातनी हिंदू समाज में भी व्यापक रोष फैल गया है।

भक्तों का कहना है कि मंदिर में पिछले कई दशकों से दान के रूप में बड़ी मात्रा में बहुमूल्य आभूषण, चांदी की मूर्तियां, और सोने के सिक्के चढ़ाए जाते रहे हैं। ऐसे में तोशाखाने से कुछ न मिलना संदेह पैदा करता है। भक्तों और संतों का आरोप है कि वर्षों से मंदिर की संपत्ति का सही तरीके से लेखा-जोखा नहीं रखा गया और अब तोशाखाना खुलने पर इसके भीतर की स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी जी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। फलाहारी जी ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि तोशाखाने पर सरकारी सील न होने का फायदा उठाकर कुछ व्यवस्थापकों और संबंधित अधिकारियों ने श्री बांके बिहारी मंदिर की संपत्ति में बड़े स्तर पर हेराफेरी की है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि मंदिर में दान की गई बहुमूल्य वस्तुएं सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था का प्रतीक हैं और उनके गायब होने से करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। फलाहारी जी महाराज ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंपी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

उन्होंने यह भी बताया कि 19 अक्टूबर 2025 को इसी विषय पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक पत्र भेजा गया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। फलाहारी जी ने कहा कि यदि जल्द ही इस विषय पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो संत समाज इसे सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के खिलाफ गंभीर अपराध मानेगा।

ब्रज क्षेत्र के कई प्रमुख संतों और आश्रमों ने भी इस मामले पर गहरी नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि बांके बिहारी मंदिर न केवल वृंदावन की आत्मा है, बल्कि पूरे भारतवर्ष में आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की एक-एक वस्तु भक्तों की श्रद्धा से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि दान में दी गई संपत्ति गायब है, तो यह केवल चोरी नहीं बल्कि भक्तों की भावनाओं के साथ धोखा है।

स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी सरकार से अपील की है कि इस मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए। मंदिर के आस-पास के इलाकों में यह चर्चा जोरों पर है कि तोशाखाना में पहले बड़ी मात्रा में चांदी के बर्तन, स्वर्णाभूषण, और प्राचीन दस्तावेज मौजूद थे। लेकिन अब इनमें से कोई भी वस्तु नहीं मिली। लोगों का कहना है कि यह संभव नहीं कि इतने वर्षों में सब कुछ गायब हो जाए और किसी को इसकी जानकारी न हो।

मंदिर प्रबंधन की ओर से हालांकि अभी तक इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रशासन का कहना है कि तोशाखाने को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार खोला गया और पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक अधिकारी, ट्रस्ट प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस मौजूद थे। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि जो भी वस्तुएं तोशाखाना में थीं, उनकी सूची अदालत को सौंप दी गई है। वहीं, संत समाज इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जब कमरे को खोला गया, तब कोई सरकारी सील नहीं थी, और यह स्थिति संदेह को और गहरा करती है।

संतों ने आरोप लगाया है कि कई वर्षों तक मंदिर की आय और दान का उचित ऑडिट नहीं हुआ, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। ब्रजवासी साधु-संतों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने भक्तों की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया और सीबीआई जांच की प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं की, तो वे और अन्य धार्मिक संगठन आमरण अनशन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि श्री बांके बिहारी जी की प्रतिष्ठा और सनातन धर्म की रक्षा के लिए है।