हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने किया ऐलानहरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने किया ऐलान

हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने किया ऐलान

 

हरियाणा की राजनीति में अक्सर सुर्खियों में रहने वाली कांग्रेस एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कुछ अलग है। लंबे समय से पार्टी के भीतर गुटबाजी और “पोस्टर पॉलिटिक्स” का जो खेल चलता आ रहा था, उस पर अब प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सख्त एक्शन लिया है।

उन्होंने साफ संदेश दिया है कि, अब कांग्रेस में चेहरों की नहीं, संगठन की राजनीति होगी। हरियाणा कांग्रेस बीते कुछ सालों से आंतरिक गुटबाजी की वजह से बार-बार सुर्खियों में रही है। कहीं दीपेंद्र हुड्डा के समर्थकों ने सैलजा के बैनर हटाए, तो कहीं सुरजेवाला या अन्य नेताओं के समर्थकों ने विरोध में पोस्टर फाड़े

किसी रैली में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तस्वीर बड़ी दिखाई गई, तो किसी कार्यक्रम में प्रियंका गांधी या राहुल गांधी की जगह स्थानीय नेताओं की फोटो ऊंची लगा दी गई। इन सब घटनाओं ने न सिर्फ पार्टी के अनुशासन पर सवाल खड़े किए, बल्कि संगठन की एकता पर भी आघात पहुंचाया।

अब प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इन विवादों पर पूर्णविराम लगाने का फैसला लिया है। उन्होंने एक नया अनुशासन कोड जारी किया है, जिसमें हर पोस्टर, होर्डिंग और डिजिटल डिजाइन पर नेताओं की तस्वीरों का तय क्रम निर्धारित किया गया है।

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राव नरेंद्र सिंह के इस नए आदेश के अनुसार अब हर प्रचार सामग्री पर केवल 10 नेताओं की तस्वीरें ही लगाई जाएंगी। जिनमें शामिल होंगे सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, बी.के. हरिप्रसाद, राव नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और दीपेंद्र हुड्डा

इन तस्वीरों का क्रम भी स्पष्ट रूप से तय किया गया है ताकि कोई भी जिला इकाई, गुट या समर्थक अपनी मर्जी से डिजाइन न करवा सके। साथ ही जिला अध्यक्ष या स्थानीय पदाधिकारी की फोटो केवल नीचे बाईं ओर छोटे आकार में लगाई जा सकेगी। किसी अन्य नेता या समर्थक को अपनी तस्वीर लगाने की अनुमति नहीं होगी।

कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जिस “चेहरा बनाम चेहरा” की लड़ाई ने संगठन को कमजोर किया, उस पर राव नरेंद्र का ये कदम एक कठोर लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है। उन्होंने सभी जिला अध्यक्षों, पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि, आगे से हर कार्यक्रम में पार्टी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होगा।

इस पर राव नरेंद्र सिंह ने कहना है कि,“कांग्रेस व्यक्ति-आधारित राजनीति से बाहर निकल रही है। अब हमारा हर आयोजन संगठन-केंद्रित होगा, न कि चेहरा-केंद्रित।”

उनका ये बयान साफ संकेत देता है कि, पार्टी अब अपने अंदर की गुटबाजी को खत्म करने के मूड में है। अब जब लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव करीब हैं, तो हाईकमान नहीं चाहता कि, अंदरूनी कलह से पार्टी की छवि को फिर नुकसान पहुंचे।

इसलिए ये नया अनुशासन कोड एक “संतुलन साधने की कोशिश” के रूप में देखा जा रहा है। ताकि कोई भी गुट खुद को हाशिए पर महसूस न करे और संगठनात्मक एकता बनी रहे।

साथ ही “राव नरेंद्र ने वार उसी जगह किया है जहां पार्टी सबसे ज्यादा कमजोर थी। चेहरों की लड़ाई पर। अब पार्टी में फोटो का हक नहीं, अनुशासन पहचान होगा।” पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि, ये कदम भले ही सख्त लगे, लेकिन इससे संगठन में अनुशासन और समानता की भावना बढ़ेगी।

पहले जहां हर जिला अपने हिसाब से बैनर बनवाता था और पोस्टर पर जिस नेता का दबदबा होता था, वही “चेहरा” बन जाता था। अब ये स्थिति बदल जाएगी। हर नेता को एक तय जगह और समान महत्व मिलेगा।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि, ये अनुशासन कोड केवल एक “पोस्टर आदेश” नहीं बल्कि एक चुनावी रणनीति है। हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी छवि “एकजुट और अनुशासित संगठन” के रूप में दिखाना चाहती है।

जहां बीजेपी लगातार “डबल इंजन सरकार” के संदेश के साथ मैदान में उतरती है, वहीं कांग्रेस अब “संगठन एक, आवाज एक” के नारे के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।

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