हिमाचल प्रदेश में बारिश से मची तबाहीहिमाचल प्रदेश में बारिश से मची तबाही

हिमाचल प्रदेश में बारिश से मची तबाही

 

 

हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश से जीवन प्रभावित हुआ है। किन्नौर जिले के थाच गांव में गुरुवार को देर रात अचानक बादल फटने से इलाके में भारी नुकसान हुआ।

नाले में अचानक आई बाढ़ की वजह से दो गाड़ियां बह गईं, साथ ही खेत और बगीचे भी पानी में डूब गए। स्थानीय लोग रात भर अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि, कई मकान अभी भी खतरे के घेरे में हैं।

शिमला में भी गुरुवार रात करीब 1 बजे एडवर्ड स्कूल के पास भूस्खलन हुआ। पहाड़ी की मिट्टी खिसकने की वजह से आसपास के बहुमंजिला मकान को खतरा पैदा हो गया। इस घटना के तुरंत बाद शिमला की मुख्य सड़क, सर्कुलर रोड, को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया।

प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए, एडवर्ड स्कूल में शुक्रवार और शनिवार की छुट्टी भी घोषित कर दी है।

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कुमारसैन के करेवथी पंचायत में तीन मंजिला मकान अचानक जमीन धंसने से पूरी तरह जमींदोज हो गया। कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में भी लगातार बारिश से हालात बिगड़ गए, रातभर तेज वर्षा जारी रही।
मौसम विभाग के अनुसार, आज से मानसून का असर थोड़ा कमजोर हो सकता है।

हालांकि, शिमला समेत अधिकांश इलाकों में मौसम अभी भी खराब है। अगले पांच दिनों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना है, लेकिन भारी बारिश का कोई अलर्ट फिलहाल जारी नहीं किया गया है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 जून से 18 सितंबर तक हिमाचल में सामान्य से 46 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। इस अवधि में औसत 698.3 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार कुल 1019.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मंडी में सर्वाधिक 1901.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

विशेष रूप से शिमला और कुल्लू जिलों में नॉर्मल के मुकाबले दोगुनी बारिश हुई है। शिमला में 108 प्रतिशत और कुल्लू में 107 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। भारी बारिश से न सिर्फ यातायात प्रभावित हुआ है, बल्कि संपत्ति और जीवन को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

इस मानसून में अब तक लगभग 4,595 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति तबाह हो चुकी है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 419 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, लगभग 1,520 मकान पूरी तरह और करीब 7,000 मकानों को आंशिक क्षति पहुंच चुकी है।

शिमला शहर में सर्कुलर रोड बंद होने से यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि, वे गैरजरूरी यात्रा से बचें और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में न जाएं। कुमारसैन में तीन मंजिला मकान जमींदोज होने से आसपास के लोग भयभीत हैं और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किए जा रहे हैं।

किन्नौर के थाच गांव में भी बाढ़ के कारण खेत और गाड़ियां बह गईं। स्थानीय लोगों ने रातभर घरों को खाली करके सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

मौसम विभाग ने चेताया है कि, हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर रहेगा। हल्की बारिश और मूसलधार वर्षा का दौर शुरू हो सकता है। पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रहेगा। अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।

इस बार हिमाचल में मानसून का प्रभाव सामान्य से काफी अधिक रहा है। लगातार बारिश ने पहाड़ी इलाकों में खतरे की घंटी बजा दी है। शिमला, किन्नौर, कुमारसैन और अन्य प्रभावित जिलों में प्रशासन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय लोग मिलकर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।

आम जनता से अपील की जा रही है कि, वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें, गैरजरूरी यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

इस मानसून ने साबित कर दिया है कि, पर्वतीय राज्य में भारी बारिश और भूस्खलन की तैयारी बेहद जरूरी है। प्रशासन और नागरिकों की सतर्कता ही ऐसी आपदाओं में जान और संपत्ति की सुरक्षा कर सकती है।

By admin

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