पंजाब में एक फिर दिखने लगा बरसात का कहरपंजाब में एक फिर दिखने लगा बरसात का कहर

पंजाब में एक फिर दिखने लगा बरसात का कहर

 

 

सितंबर का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन पंजाब में मानसून अभी भी पूरी तरह विदा नहीं हुआ। शुक्रवार को सुबह से ही आसमान में बादलों ने डेरा जमा लिया और कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया।

पंजाब जो बाढ़ के प्रभाव के बाद उभरने की कोशिश कर रहा है। वहीं इस बारीश से सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों और बांधों के किनारे बसे लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।

वहीं मौसम विभाग ने शुक्रवार को जिन जिलों में बारिश की संभावना जताई, उनमें पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली) और पटियाला शामिल हैं। इन जिलों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई है

पंजाब के बाकी जिलों में भी बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बूंदाबांदी दर्ज की जा सकती है। विभाग का कहना है कि, 20 सितंबर तक मानसून राज्य से पूरी तरह विदा हो जाएगा, लेकिन जाते-जाते ये कुछ जिलों में अच्छी खासी बारिश देकर जाएगा।

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साथ ही इस बारिश का सीधा असर भाखड़ा नंगल डैम पर देखने को मिला है। शुक्रवार को बांध का जलस्तर 1677.68 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसका खतरे का निशान 1680 फीट है।
प्रशासन ने चारों फ्लड गेट एक-एक फुट तक खोल दिए हैं, ताकि बांध पर अतिरिक्त दबाव न बने

फिलहाल डैम में पानी की आमद 56,334 क्यूसेक है और टरबाइन व फ्लड गेटों से करीब 40,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

नंगल डैम से पानी की निकासी भी बढ़ा दी गई है। नंगल हाइडल नहर और आनंदपुर हाइडल नहर में 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं सतलुज नदी में 27,000 क्यूसेक पानी बह रहा है। इससे निचले इलाकों में खतरा और बढ़ गया है। सतलुज के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का डर फिर से मंडराने लगा है।

बारिश और बढ़ते जलस्तर ने मंडाला छन्ना इलाके में बने धुसी बांध को भी प्रभावित किया है। यहां पानी के तेज बहाव से बांध पर बनाई गई रोकें टूट चुकी हैं। नतीजा ये हुआ कि, बांध के पास बने चार मकान जर्जर होकर गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि, अगर प्रशासन ने तुरंत पुख्ता इंतजाम नहीं किए तो कई परिवार बेघर हो सकते हैं। किसान भी परेशान हैं, क्योंकि खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलें नुकसान की चपेट में आ सकती हैं।

वहीं सितंबर का महीना धान की फसल के लिए अहम माना जाता है। बारिश और बाढ़ जैसे हालात सीधे धान की कटाई को प्रभावित कर सकते हैं। जिन इलाकों में धुसी बांध या सतलुज का पानी भर रहा है, वहां खेतों में खड़ी फसल डूबने लगी है।

किसानों का कहना है कि, पहले ही धान की लागत ज्यादा है और अब मौसम की मार पड़ने से उत्पादन पर असर पड़ेगा। इस स्थिति में सरकार से मुआवजे की मांग भी तेज हो सकती है।
पंजाब सरकार और जल संसाधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

निचले इलाकों में राहत दल तैनात किए गए हैं। जिन गांवों में खतरा ज्यादा है, वहां लोगों को सतर्क रहने और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) ने साफ किया है कि, फिलहाल जलस्तर नियंत्रण में है, लेकिन अगर बारिश तेज होती है तो फ्लड गेट और ज्यादा खोले जा सकते हैं।

पंजाब में आज की बारिश से सतलुज का बढ़ता जलस्तर किसानों और ग्रामीणों के लिए नई चुनौती बन गया है। भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी और धुसी बांध पर मंडरा रहे खतरे ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। ऐसे में अगले 48 घंटे राज्य के लिए बेहद अहम रहेंगे।

By admin

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