हरियाणा परिवहन विभाग में लगातार प्रशासनिक बदलाव
हरियाणा के सीनियर कैबिनेट मंत्री और प्रदेश के चर्चित चेहरे अनिल विज के परिवहन विभाग में लगातार प्रशासनिक सचिवों के बदलाव को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। पिछले साढ़े 10 महीने में इस विभाग में चौथा प्रशासनिक सचिव तैनात किया गया है।
दरअसल लगातार ये सवाल उठ रहा है कि, आखिर क्यों अनिल विज के साथ ही प्रशासनिक सचिवों के इतने बदलाव होते रहे हैं। जब अनिल विज को परिवहन विभाग का जिम्मा मिला था, तब प्रशासनिक सचिव आईपीएस नवदीप सिंह विर्क थे।
अनिल विज ने सरकार से कहा कि, विभाग में आईएएस अधिकारी ही प्रशासनिक सचिव हों। जिसके बाद सरकार ने 1991 बैच के आईएएस अशोक खेमका को अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया। खेमका का कार्यकाल 30 अप्रैल, 2025 तक ही था।
इसके बाद 2002 बैच के आईएएस टीएल सत्यप्रकाश को परिवहन विभाग का सचिव नियुक्त किया गया। सत्यप्रकाश केवल चार महीने ही इस पद पर रहे। अब 1990 बैच के आईएएस राजा शेखर कुंडरू को प्रशासनिक सचिव बनाया गया है।
इस तरह साढ़े 10 महीनों में नवदीप सिंह विर्क, अशोक खेमका, टीएल सत्यप्रकाश और राजा शेखर कुंडरू, चार प्रशासनिक सचिव परिवहन विभाग में तैनात किए गए। ऐसे में माना जा रहा है कि, किसी भी विभाग को पूरी तरह समझने और उसके कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में कम से कम तीन-चार महीने का समय लगता है।
ऐसे में चार प्रशासनिक सचिवों का लगातार बदलना विभाग की गति को प्रभावित करता है।
चर्चा ये भी है कि, अनिल विज परिवहन विभाग को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य हरियाणा रोडवेज का बस बेड़ा बढ़ाकर 8,000 तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने विभाग में सुधार और प्रगति के कई प्रस्ताव तैयार किए थे।
2025 में सीईटी के आयोजन में परिवहन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। 13.5 लाख छात्रों के लिए बसों का प्रबंधन करना इस विभाग की जिम्मेदारी थी।
वहीं टीएल सत्यप्रकाश ने चार महीने के कार्यकाल में AI तकनीक का इस्तेमाल कर विभाग की कार्य प्रणाली को अपडेट किया। लेकिन उनका कार्यकाल समाप्त होते ही नया सचिव राजा शेखर कुंडरू आए। उन्हें विभाग की पूरी प्रणाली को समझने में समय लगेगा, जिससे अगले कुछ महीनों में विभाग की गति धीमी होने की संभावना है।
ऐसे में कहा ये भी जा रहा है कि, प्रशासनिक सचिवों की तैनाती में ये चेनिंग प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। राजा शेखर कुंडरू के आने से पहले सुधीर राजपाल महिला बाल विकास विभाग में थे। उनके जाने से टीएल सत्यप्रकाश का विभाग खाली हुआ और उन्हें परिवहन विभाग सौंपा गया। इस तरह तीन विभागों में तीन-चार महीने तक व्यवधान की स्थिति बनी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि, प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्षों को कम से कम दो साल का कार्यकाल दिया जाना चाहिए। इससे विभाग के कामकाज में निरंतरता बनी रहती है। पुलिस विभाग में भी ऐसा होता है। डीजीपी और फील्ड अधिकारियों को न्यूनतम दो साल का कार्यकाल मिलता है, ताकि वे योजनाओं को धरातल पर उतार सकें।
चार-चार महीने में लगातार अफसर बदलने से विभाग की प्रगति पर असर पड़ता है।
सरकार ने पांच महीने के कार्यकाल वाले अशोक खेमका को भी परिवहन विभाग में तैनात किया, जबकि उनका रिटायरमेंट नजदीक था। इसके बाद टीएल सत्यप्रकाश को चार महीने बाद हटाया गया। अब सवाल ये उठता है कि, क्या अनिल विज के विभाग में लगातार अफसर बदलने का कोई विशेष कारण है?
वहीं चर्चा ये भी है कि, कैबिनेट मंत्री अनिल विज इन बदलावों को लेकर नाराज हैं। विभाग के लगातार बदलते अफसरों की वजह से उनकी योजनाओं को पूर्ण रूप से लागू करना मुश्किल हो रहा है। इससे न केवल विभाग की कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकार की नीतियों के कार्यान्वयन में भी बाधा आ रही है।
हरियाणा के परिवहन विभाग की स्थिति पर नजर डालें तो 3800 बसों का बेड़ा अभी भी संचालित है। प्रदेश की आबादी 2.80 करोड़ के आसपास है। अगर सार्वजनिक परिवहन में सुधार नहीं होगा तो प्रदेश की बड़ी योजनाओं और नंबर-1 बनने की कवायद में भी बाधा आएगी।
वहीं विशेषज्ञों की माने तो प्रशासनिक सचिवों की बार-बार तैनाती और बदलती कार्यशैली विभाग की गति धीमी करती है। अनिल विज जैसे अनुभवी मंत्री भी तब तक विभाग को आगे नहीं बढ़ा सकते जब तक उन्हें स्थायी और सक्षम प्रशासनिक सचिव न मिलें।
इस स्थिति से सवाल उठता है कि, क्या सरकार भविष्य में इस तरह के बदलावों को रोकने और विभागों में स्थायित्व लाने के लिए कोई कदम उठाएगी। अनिल विज के साथ लगातार अफसर बदलने की ये कहानी न केवल उनके लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि हरियाणा की विकास योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

