PM नरेद्र मोदी ने जाने पंजाब के हालातPM नरेद्र मोदी ने जाने पंजाब के हालात

PM नरेद्र मोदी ने जाने पंजाब के हालात

पंजाब इन दिनों भीषण बाढ़ आपदा का सामना कर रहा है। लगातार बारिश, नदियों और बांधों से छोड़े गए पानी ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। राज्य के 12 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं, जहां अब तक करीब 2 लाख 56 हजार से ज्यादा लोग सीधे प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1312 गांवों में हालात बिगड़े हुए हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश दौरे से लौटते ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को फोन किया, और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। पीएम ने राज्य को हर संभव मदद और समर्थन देने का भरोसा दिया। इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री को फोन कर नुकसान की जानकारी ली थी।

CM मान ने PM को पत्र लिखकर पंजाब की मौजूदा स्थिति को बेहद मुश्किल बताया है। पत्र में उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और आम लोगों पर बाढ़ का भारी असर हुआ है। इसीलिए केंद्र सरकार से 60 हजार करोड़ रुपये का बकाया फंड तुरंत जारी करने की अपील की गई है।

वही पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा कि, पंजाब का बड़ा हिस्सा जलमग्न है और लाखों लोग संकट में हैं। करीब तीन लाख एकड़ कृषि भूमि, खासकर धान की फसल, पानी में डूब चुकी है। कटाई से पहले ही किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इसके अलावा हजारों पशुओं की मौत हो चुकी है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई है।

सरकार ने एसडीआरएफ के नियमों में बदलाव की मांग की है ताकि किसानों को बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा 50 हजार रुपये तक बढ़ाकर दिया जा सके।
पंजाब के जिन 12 जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है, उनमें अमृतसर, गुरदासपुर, मोगा, पठानकोट, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर, पटियाला, मोहाली, कपूरथला, जालंधर और लुधियाना शामिल हैं।

जालंधर जिले के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 7वीं बटालियन गुरदासपुर और आसपास के क्षेत्रों में तैनात है। गुरदासपुर, अमृतसर और कपूरथला में नदियों का पानी गांवों में घुस चुका है। कई जगहों पर लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं बांधो का बढ़ता जलस्तर इस स्थित को और गंभीर बना रहा है।

गौरतलब ये है कि भाखड़ा डैम पिछले 24 घंटों में जलस्तर में 2.40 फीट की बढ़ोतरी हुई है। सोमवार सुबह तक यह 1675.08 फीट पर पहुंच गया, जबकि इसकी अधिकतम सीमा 1680 फीट है। साथ ही सतलुज नदी में पानी की आवक 1.9 लाख क्यूसेक तक पहुंच गई है, जबकि निकासी केवल 53 हजार क्यूसेक रही

वही पौंग डैम अधिकतम सीमा 1390 फीट है। सोमवार को जलस्तर थोड़ा घटकर 1390.36 फीट रहा, लेकिन फिर भी निकासी करीब 1.1 लाख क्यूसेक दर्ज की गई। साथ ही रणजीत सागर डैम ये भी पिछले सप्ताह खतरे के निशान को पार कर चुका है और अभी भी गंभीर स्थिति बनी हुई है।

CM मान ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है, जिसमें बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों पर चर्चा की जाएगी। कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने राहत कार्यों के लिए अपना एक साल का पूरा वेतन दान कर दिया है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस रूपनगर में खुद मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य में जुट गए।

दरअसल पंजाब की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। इस समय धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने लाखों एकड़ फसल को डुबो दिया है। गांवों में पशुधन की मौत ने ग्रामीण परिवारों की मुसीबत और बढ़ा दी है।

कई परिवारों के पास न तो खाने को अनाज बचा है। गुरदासपुर और कपूरथला में कई गांव पूरी तरह पानी से घिर गए हैं। लोगों को नावों से बाहर निकाला जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे खराब है।

वहीं विशेषज्ञों की माने तो पंजाब को लंबे समय तक इस बाढ़ का असर झेलना होगा। खेतों में पानी भर जाने से आने वाले महीनों में भी खेती प्रभावित होगी। पशुधन की मौत और फसल के नुकसान से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। वहीं, घरों और सड़कों को हुए नुकसान की मरम्मत में भी समय और भारी खर्च लगेगा।

पंजाब इस वक्त बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। मुख्यमंत्री से लेकर आम जनता तक सभी राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन हालात इतने गंभीर हैं कि अकेले राज्य सरकार के बूते इन्हें संभालना मुश्किल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर संभव मदद का भरोसा दिया है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब केंद्र से बड़े पैकेज की घोषणा होगी और किसानों, मजदूरों और प्रभावित परिवारों तक तुरंत सहायता पहुंचेगी।

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