68 बिलियन डॉलर भारत में निवेश करेगा जापान, भारत और जापान मिलकर तोड़ेंगे ट्रंप का घमंड!68 बिलियन डॉलर भारत में निवेश करेगा जापान, भारत और जापान मिलकर तोड़ेंगे ट्रंप का घमंड!

भारत और जापान मिलकर तोड़ेंगे ट्रंप का घमंड!

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापारिक रिश्तों की बिसात पर एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एकतरफा कदम उठाते हुए 50 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद भारत से अमेरिका को होने वाले आयात पर अब पहले से दोगुना शुल्क देना होगा। अमेरिका ने ये कदम उस समय उठाया है जब दोनों देशों के बीच कई महीनों से व्यापारिक खींचतान चल रही है।

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि, भारत रूस से तेल और हथियारों की खरीदारी कर अमेरिकी हितों की अनदेखी कर रहा है। इसी आधार पर पहले 25% और अब अतिरिक्त 25% “पेनल्टी टैरिफ” लगाया गया है। अमेरिका इसे अपनी “सुरक्षा नीति” से जोड़कर पेश कर रहा है, लेकिन भारत ने इस कदम को पूरी तरह एकतरफा और अनुचित करार दिया है। भारत ने साफ कर दिया है कि वो किसी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। केंद्र सरकार का कहा है कि, अमेरिका अपने कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए भारतीय बाजार खोलना चाहता है, लेकिन ये संभव नहीं है क्योंकि इससे भारत के किसानों पर सीधा असर पड़ेगा।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि, अगर अमेरिका 50% टैरिफ लगाता है तो इसके असर को कम करने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। पिछले छह महीनों से भारत वैकल्पिक बाजारों की तलाश में जुटा भी हुआ है, ताकि अमेरिकी निर्भरता घटाई जा सके। आज भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में चौथे नंबर पर है और आने वाले वर्षों में तीसरे पायदान पर पहुंचने की संभावना है। इस स्थिति ने भारत को एक अहम वैश्विक खिलाड़ी बना दिया है। ऐसे में अमेरिका का ये फैसला केवल द्विपक्षीय व्यापारिक विवाद नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करने वाला कदम है।

भारत जिस तेजी से विकासशील देशों से रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा है, वो ये संकेत देता है कि भारत, अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने के मूड में नहीं है। इसी कड़ी में जापान के साथ भारत का बढ़ता सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है।

अमेरिका की कठोर नीति के बीच जापान ने भारत को लेकर बड़ा ऐलान किया है। जापान ने घोषणा की है कि वो अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन यानी के करीब 68 बिलियन डॉलर का निवेश भारत में करेगा।

ये ऐलान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली शिखर बैठक के दौरान किया जाएगा। इस बैठक पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसमें 17 साल बाद सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा को संशोधित किया जाएगा। इससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।

जापान का ये निवेश आठ प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा –

मोबिलिटी, पर्यावरण, हेल्थ, औद्योगिक सहयोग, तकनीकी अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर उत्पादन,स्टार्टअप इकोसिस्टम

जिसके तहत ये कहना गलत नहीं होगा कि, भारत और जापान मिलकर AI सहयोग पहल की शुरुआत करेंगे। इसका मकसद सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल करना है। भारत ने जापान की उन्नत सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों में गहरी रुचि दिखाई है। इसके तहत जापानी कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन की सुविधाओं का दौरा भी किया जाएगा।

जापान भारतीय स्टार्टअप्स में खास दिलचस्पी दिखा रहा है। विशेषकर तेलंगाना और हैदराबाद के IT हब को जापानी निवेश का बड़ा फायदा मिलेगा। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने यहां के उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए येन लोन मुहैया कराने की योजना बनाई है।ये सहयोग महज पूंजी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन भी शामिल होंगे। भारतीय स्टार्टअप्स को जापानी बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा, जबकि जापान को भारत की युवा और प्रतिभाशाली कार्यबल का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।

जापान में वर्तमान समय की बात करें तो, यहां हाई-टेक क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की भारी कमी है। अनुमान है कि 2030 तक ये कमी लगभग 7.9 लाख तक पहुंच जाएगी। इसे पूरा करने के लिए जापान अगले पांच वर्षों में भारतीय विशेषज्ञों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखता है। जापानी कंपनियां जैसे सोम्पो केयर और सेकिशो एनर्जी भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही हैं। इन कार्यक्रमों में भाषा शिक्षा, नौकरी प्लेसमेंट और सांस्कृतिक प्रशिक्षण भी शामिल होगा, ताकि भारतीय पेशेवर जापानी माहौल में सहजता से काम कर सकें।सेकिशो ने तो हाल ही में भारत में अपनी स्थापना भी कर दी है, ताकि यहां से सीधे भारतीय छात्रों और पेशेवरों को जापान भेजने की प्रक्रिया आसान हो सके।

भारत और जापान के बीच ये नया सहयोग निश्चित रूप से अमेरिका के लिए एक संदेश है।

जहां ट्रंप प्रशासन भारत पर दबाव बनाने में व्यस्त है, वहीं टोक्यो ने ये दिखा दिया है कि एशिया में भारत एक अपरिहार्य साझेदार है।अगर ये निवेश और रणनीतिक सहयोग सफल रहता है, तो भारत न केवल अमेरिकी टैरिफ के असर को कम कर पाएगा बल्कि एशिया में अपनी आर्थिक और सामरिक ताकत भी बढ़ा लेगा।

आज की दुनिया बहुध्रुवीय हो चुकी है। कोई भी देश केवल एक शक्ति केंद्र पर निर्भर होकर अपने हित सुरक्षित नहीं रख सकता।

भारत का झुकाव जापान, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर यही दर्शाता है कि वो संतुलित कूटनीति पर भरोसा करता है। जापान भी चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत के साथ साझेदारी को मजबूती देना चाहता है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, सामरिक साझेदारी और आर्थिक रिश्ते एशिया में नई ताकत बन सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाना एकतरफा फैसला है, जिसने दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। लेकिन भारत ने ये साफ कर दिया है कि भारत… दबाव में नहीं झुकेगा।

 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *