UP: राकेश टिकैत की नई ‘सियासी चाल’!
उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसानों की आवाज़ फिर से गूंजने लगी है, और इस बार वजह है भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख राकेश टिकैत, जिन्होंने हाल ही में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की और बसपा प्रमुख मायावती की जमकर तारीफ की। ये घटनाक्रम पश्चिमी यूपी की राजनीतिक दिशा और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी को लेकर गंभीर संकेत दे रहा है।
29 जुलाई 2025 को राकेश टिकैत की लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं, जिसे पहले “शिष्टाचार भेंट” माना गया। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद टिकैत जब सुल्तानपुर पहुंचे, तो उनके तेवर पूरी तरह बदले नज़र आए। उन्होंने मायावती को “नंबर वन मुख्यमंत्री” करार देते हुए उनकी किसान नीतियों की सराहना की।
ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकैत का समर्थन सपा-RLD गठबंधन को मिला था, जिससे उन्हें पश्चिमी यूपी में बढ़त मिली थी। अब अगर टिकैत का झुकाव BSP या BJP की ओर होता है, तो ये सपा के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
राकेश टिकैत को 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय पहचान मिली थी। उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय तक किसानों का नेतृत्व किया और बीजेपी सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध किया। उस समय उन्होंने खुलकर बीजेपी के खिलाफ किसानों से वोट न देने की अपील की थी। उनके प्रभाव के चलते पश्चिमी यूपी में बीजेपी को नुकसान और SP-RLD को लाभ हुआ।
लेकिन अब जो तस्वीर उभर रही है, वो बताती है कि, टिकैत अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में दलित, किसान और पिछड़ा वर्ग की नई गोलबंदी हो सकती है, जिसमें BSP और BJP दोनों अपनी-अपनी भूमिका तलाश रहे हैं।
टिकैत ने मायावती को “सबसे अच्छा मुख्यमंत्री” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाती थी। BSP, जो पिछले कुछ चुनावों में हाशिए पर चली गई थी, अब पश्चिमी यूपी के दलित मतदाताओं, खासकर जाटव समुदाय को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है। अगर टिकैत का समर्थन बसपा को मिलता है, तो ये दलित-किसान गठजोड़ की नई शुरुआत हो सकती है।
BSP प्रवक्ता ने टिकैत के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि “मायावती ने हमेशा किसानों को प्राथमिकता दी है और उनकी सरकार में गांव, गरीब और खेत मजदूरों को राहत मिली थी।”
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो ब्राह्मण समुदाय के प्रभावशाली चेहरे हैं, पश्चिमी यूपी में BJP के लिए राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सपा पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव को “नमाजवादी” तक कह दिया था। टिकैत से उनकी मुलाकात को बीजेपी की किसान समुदाय में फिर से पकड़ बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो बीजेपी, जो 2024 में यूपी में 37 सीटों पर सिमट गई, अब 2027 की तैयारी में जुट गई है और इसके लिए उसे पश्चिमी यूपी में टिकैत जैसे प्रभावशाली चेहरों की दरकार है।
2024 के चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतकर भाजपा को झटका दिया था। सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति ने गैर-जाटव दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों में जगह बनाई थी। लेकिन अब अगर टिकैत सपा से दूरी बनाते हैं, और उनका समर्थन बसपा या भाजपा को मिलता है, तो यह पीडीए समीकरण की कमर तोड़ सकता है।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बयान देते हुए कहा, “अखिलेश यादव ने हमेशा किसानों और दलितों के हितों की रक्षा की है। टिकैत का बयान व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन सपा का पीडीए गठजोड़ अटूट है।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टिकैत का यह कदम केवल बयानबाजी नहीं है, बल्कि एक सुविचारित रणनीतिक शिफ्ट हो सकता है। अगर बसपा और टिकैत किसी तरह का गठजोड़ करते हैं, तो यह भाजपा के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे सपा का पारंपरिक वोट बैंक बंट सकता है।
वहीं, कांग्रेस, जो 2024 में गठबंधन के तहत कुछ मजबूती के साथ उभरी थी, अब पश्चिमी यूपी में और भी कमजोर हो सकती है।

