गोरखपुर: PAC ट्रेनिंग सेंटर में महिला सिपाहियों का बवालगोरखपुर: PAC ट्रेनिंग सेंटर में महिला सिपाहियों का बवाल

गोरखपुर: PAC ट्रेनिंग सेंटर में महिला सिपाहियों का बवाल

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित PAC ट्रेनिंग सेंटर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सैकड़ों महिला ट्रेनी सिपाही बदइंतजामी के खिलाफ बगावत पर उतर आईं। सुबह 8 बजे के करीब एक महिला सिपाही की आवाज गूंजती है- “हमें यहां खुले में नहाना पड़ रहा है। CCTV लगे हैं, आप समझिए… हमारे वीडियो बन गए। जब व्यवस्था नहीं थी, तो हमें बुलाना नहीं चाहिए था।” इतना कहने के बाद वो बेसुध होकर गिर गई। जिसके बाद एक-एक कर 600 महिला सिपाही चीखती-चिल्लाती कैंपस से बाहर निकल आईं।

बाहर आईं महिला सिपाहियों ने जो हालात बयां किए, वे चौंकाने वाले थे। एक ट्रेनी सिपाही ने बताया कि, दो दिनों से पानी नहीं मिल रहा है। जब पानी की मांग की गई तो प्रभारी ने आपत्तिजनक भाषा में जवाब दिया- “मुंह में पाइप डाल देंगे।” वहीं, दूसरी महिला ने कहा, “एक कमरे में 30-30 लड़कियां ठुंसी हुई हैं, लेकिन पंखा सिर्फ एक। 14 सिपाहियों को तो टीन-शेड में रखा गया है। टॉयलेट्स में इतनी गंदगी है कि अंदर जाना मुश्किल हो जाता है।”

महिला सिपाहियों ने बताया कि, जिस कमरे में उन्हें रखा गया है, उसमें आने-जाने के लिए सिर्फ एक दरवाजा है और वहीं पर कूलर रखा गया है, जिससे पानी फर्श पर गिरता रहता है। इससे कई लड़कियां फिसलकर गिर गईं, एक तो इतनी बुरी तरह गिरी कि उसका दांत तक टूट गया।

इस ट्रेनिंग सेंटर की कुल क्षमता 360 महिलाओं की है, लेकिन यहां 600 सिपाही रह रही हैं। जाहिर है, संसाधनों पर बोझ है। जब अफसरों को इस हंगामे की सूचना मिली, तो हड़कंप मच गया क्योंकि उसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी परिसर में एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। योगी पहले से गोरखपुर में मौजूद थे।

ADG मुथा अशोक जैन और SSP राजकरण मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिला सिपाहियों को समझाने की कोशिश की और सभी को कैंपस के मैदान में बैठाया गया। करीब 5 घंटे तक उनकी शिकायतें सुनी गईं।

महिला सिपाहियों ने ये भी आरोप लगाया कि, ट्रेनिंग शुरू होने से पहले उनसे 6000 रुपए जमा कराए गए थे, लेकिन उन्हें नाश्ता तक नहीं दिया जा रहा। सुबह 8 बजे के बाद अगला भोजन सीधे रात 8 बजे मिलता है। इतनी कठिन ट्रेनिंग के दौरान ये भोजन व्यवस्था पूरी तरह अस्वीकार्य है।

सबसे संवेदनशील शिकायत ये थी कि, बाथरूम की गैलरी में CCTV कैमरे लगे हुए हैं। महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही थीं। अधिकारियों ने जांच कर कैमरे हटवाने का आश्वासन दिया। इसी के बाद स्थिति कुछ शांत हो सकी और शाम 3:30 बजे SSP गोरखपुर ने मीडिया को बताया कि ट्रेनिंग दोबारा शुरू हो गई है।

मामला जब लखनऊ पहुंचा, तो DGP राजीव कृष्ण ने सख्त कदम उठाए। PTI को अभद्र भाषा के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया। प्लाटून कमांडर और RTC प्रभारी संजय राय भी सस्पेंड हुए। साथ ही, PAC के कमांडेंट आनंद कुमार को भी कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया।

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल DIG रोहन पी. कनय को भी पद से हटा दिया गया। उन्हें वेटिंग में डालकर डीजीपी ऑफिस भेज दिया गया है। उनके स्थान पर ASP अनिल कुमार प्रथम को प्रभारी प्रिंसिपल बनाया गया है। साथ ही, कानपुर नगर में तैनात ASP निहारिका वर्मा को गोरखपुर की 26वीं PAC बटालियन की नई कमांडेंट बनाया गया है।

मामले की आग उस समय और भड़क गई, जब पता चला कि DIG रोहन पी. कनय ने महिला सिपाहियों के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने का आदेश दिया था। इससे कई महिला सिपाही भड़क गईं। बाद में IG ट्रेनिंग चंद्र प्रकाश ने आदेश रद्द कर दिया और कहा कि किसी अविवाहित महिला का टेस्ट नहीं होगा, वे सिर्फ शपथपत्र देंगी।

गोरखपुर PAC ट्रेनिंग सेंटर की इस घटना ने प्रशासन, पुलिस व्यवस्था और सरकार की प्राथमिकताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर योगी सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं उसी की छाया में महिला सिपाही खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस कर रही हैं।