मुरादाबाद:ऊर्जा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागरमुरादाबाद:ऊर्जा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर

मुरादाबाद:ऊर्जा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर तमाम सुधारों और प्रयासों के बीच मुरादाबाद में ऐसा वाकया सामने आया, जिसने न सिर्फ ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि खुद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की मौजूदगी में हुई इस चूक ने पूरे प्रशासन को सकते में डाल दिया। मामला मुरादाबाद के सिविल लाइन चौराहे का है, जहां नगर निगम की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा और फव्वारे का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा थे।

कार्यक्रम की भव्यता और सरकार की ओर से जनता से सीधा संवाद के उद्देश्य से रखे गए इस आयोजन में सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से शुरू हुआ। मंत्री एके शर्मा जनता को ऊर्जा सुधार की योजनाओं से अवगत करा रहे थे, तभी अचानक कार्यक्रम स्थल की बिजली गुल हो गई। मंत्री की मौजूदगी में अचानक बिजली कटने की घटना ने सबको चौंका दिया। इस लापरवाही के कारण न सिर्फ आयोजन की गरिमा पर आंच आई बल्कि मंत्री खुद इस घटना से काफी नाराज नजर आए।

करीब दस मिनट के भीतर बिजली आपूर्ति दोबारा बहाल हो गई, लेकिन इस बीच जो असहजता उत्पन्न हुई, उसने कार्यक्रम का पूरा माहौल ही बदल दिया। मंत्री ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया और कार्यक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा। मंत्री की सख्ती को देखते हुए PVVNL की प्रबंध निदेशक ईशा दुहन ने तत्काल प्रभाव से बड़ी कार्रवाई की।

ईशा दुहन ने मामले की जांच के बाद 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें मुख्य रूप से चीफ इंजीनियर अरविंद सिंघल, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुनील अग्रवाल, एक्सईएन प्रिंस गौतम, एसडीओ राणा प्रताप और जेईई ललित कुमार शामिल हैं। इन सभी पर कार्यक्रम स्थल पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित न करने और वैकल्पिक व्यवस्था में चूक के आरोप हैं।

ईशा दुहन ने अपने बयान में कहा, “किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, विशेषकर जिसमें मंत्री स्तर के अधिकारी मौजूद होते हैं, वहां बिजली आपूर्ति को लेकर स्पष्ट निर्देश होते हैं। इसके बावजूद मुरादाबाद के कार्यक्रम में जो लापरवाही सामने आई है, वह अक्षम्य है।”

प्रबंध निदेशक ने ये भी बताया कि ऐसे आयोजनों के दौरान वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था, जैसे जनरेटर या बैकअप पावर यूनिट — अनिवार्य होती है। मुरादाबाद में ये तय करने की जिम्मेदारी जेई से लेकर चीफ इंजीनियर तक की थी, लेकिन किसी ने भी ये सुनिश्चित नहीं किया कि अगर मुख्य आपूर्ति बाधित हो तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था से बिजली उपलब्ध हो जाए।

बिजली मंत्री शर्मा, जो कि इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में ऊर्जा सुधार योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना चाहते थे, इस घटना के बाद काफी आक्रोशित नजर आए। वे जनता से बिजली सेवाओं में सुधार, ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाने, समय पर बिलिंग और उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के विषयों पर संवाद कर रहे थे। लेकिन आयोजन के दौरान बिजली जाने से सरकार की योजनाओं का संदेश भी बाधित हुआ।

स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम के बाद सकते में हैं। एक तरफ जहां जनता के बीच सरकार की छवि को ठेस पहुंची, वहीं दूसरी तरफ विभागीय लापरवाही पर तत्काल और कठोर कार्रवाई ने ये संकेत भी दे दिया कि, योगी सरकार व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इस घटना ने ये भी दिखा दिया कि, उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर भले ही योजनाएं बन रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी उन मानकों से कोसों दूर है, जिन्हें लेकर सरकार जनता के बीच विश्वास कायम करना चाहती है।
बिजली मंत्री एके शर्मा ने भी ये संकेत दे दिया है कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विभागीय अनुशासन को सर्वोपरि रखा जाएगा। मुरादाबाद की यह घटना आने वाले समय में पूरे प्रदेश के बिजली अधिकारियों के लिए एक चेतावनी साबित हो सकती है।