रामपुर से उठी ड्रोन अफवाह की लहर
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में एक बार फिर अफवाहों का तांडव देखने को मिल रहा है। इस बार वजह बनी है एक रहस्यमयी ड्रोन की अफवाह, जिसने न केवल रामपुर बल्कि हापुड़, मुरादाबाद, बागपत, बिजनौर, अमरोहा और संभल जैसे जिलों में दहशत फैला दी है। ग्रामीण इलाकों में लोग रात-रात भर लाठी-डंडों के साथ पहरा दे रहे हैं और पूरे गांव में भय का माहौल है।
रामपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में अफवाह फैली है कि रात के समय आसमान में एक संदिग्ध ड्रोन उड़ता देखा जा रहा है, जो किसी खतरनाक गतिविधि से जुड़ा हो सकता है। इससे डरकर गांव के लोग रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है। रात होते ही लोगों के मोबाइल फोन बजने लगते हैं, और हर कॉल में अगली गली या गांव में ड्रोन के देखे जाने की बात होती है।
इस मामले पर रामपुर के पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र ने बताया कि बीते तीन-चार दिनों से ड्रोन देखे जाने की सूचनाएं मिल रही हैं। लेकिन अभी तक किसी भी सूचना की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार क्षेत्र में रात में गश्त कर रही है। बीट पुलिसकर्मी, थानाध्यक्ष, एडिशनल एसपी और खुद एसपी मिश्रा भी रात को फील्ड में रहकर निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, अगर कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखे तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दें।”
यह पहली बार नहीं है जब उत्तर भारत इस तरह की अफवाहों की चपेट में आया हो। बीते दो दशकों में कई बार बेबुनियाद सूचनाओं ने समाज में दहशत फैलाई है।
1. चोटी कटवा (2017):
दिल्ली, एनसीआर और उत्तर भारत में अफवाह फैली कि रात में कोई महिलाओं की चोटी काट रहा है। नींबू-मिर्ची लटकाने और हल्दी के हाथ के निशान लगाने जैसी तमाम ओझा-टोना विधियों का सहारा लिया गया। आगरा में एक बुजुर्ग महिला की हत्या तक कर दी गई।
2. मंकी मैन (2001):
दिल्ली और आसपास के इलाके “मंकी मैन” नामक एक रहस्यमयी हमलावर की अफवाह से कांप उठे। दावा था कि उसके शरीर पर काले बाल हैं और वह हेलमेट पहनता है। कई ने उस पर हमले का दावा किया, लेकिन जांच में कुछ भी सामने नहीं आया।
3. सिलबट्टे वाली बुढ़िया (2015):
बिहार और एनसीआर में यह अफवाह फैली कि एक बूढ़ी औरत रात में घर में घुसकर सिलबट्टे से लोगों की पिटाई करती है। लोग अपने रसोई के सिलबट्टे छिपाने लगे। यह भी अफवाह साबित हुई।
4. मुंहनोचवा (2002):
पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैली इस अफवाह के मुताबिक कोई रहस्यमयी चीज रात में आसमान से उतरकर लोगों के मुंह पर हमला करती थी। डर के मारे लोगों ने छतों पर सोना बंद कर दिया था। बाद में यह भी निराधार निकला।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत में अफवाह फैलाने के 882 मामले दर्ज किए गए। इनमें उत्तर प्रदेश में 82 मामले सामने आए। सबसे ज्यादा केस तेलंगाना (218), फिर तमिलनाडु (140) और मध्यप्रदेश (129) में दर्ज हुए।
साल 2019 में बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते उत्तर प्रदेश और बिहार में कई निर्दोष लोगों की जान गई। भीड़ ने अफवाहों के आधार पर कई जगहों पर पीट-पीटकर हत्याएं कर दीं। इन घटनाओं के बाद भी समाज में अफवाहों को लेकर सचेतता की गंभीर कमी दिख रही है।
सोशल मीडिया और मोबाइल नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव ने इन अफवाहों को जंगल की आग की तरह फैलाने का काम किया है। एक व्हाट्सएप मैसेज या फेसबुक पोस्ट सैकड़ों लोगों में भय और भ्रम फैला सकता है। इसीलिए पुलिस और प्रशासन बार-बार लोगों से अपील कर रहे हैं कि बिना पुष्टि की सूचना को साझा न करें।

