उम्मीद से पहले ही सूख गए हैं प्राकृतिक जल स्रोत

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के बाहरी इलाके में चेक दारा हरवान में किसान काफी परेशानी में हैं । एक ऐसा क्षेत्र जो कभी हरे-भरे धान के खेतों के लिए जाना जाता था, वहां अब सूखी धरती में दरारें दिखाई देने लगी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राकृतिक जल स्रोत जो कभी नहरों को पानी देते थे वे उम्मीद से बहुत पहले ही सूख गए हैं।

बता दें कि, बढ़ते तापमान और बर्फबारी की कमी को जल संकट के बिगड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिससे किसानों की आजीविका का एकमात्र स्रोत खतरे में पड़ गया है। वहीं, स्थानीय किसान ने बताया कि, “बर्फबारी बहुत कम हुई है, पिछले साल बर्फबारी हुई थी इसलिए पानी की कोई दिक्कत नहीं हुई। इस साल बर्फबारी नहीं हुई और गर्मी के कारण जो पानी था वो भी खत्म हो गया। अब जमीन बेकार हो गई है। पानी नहीं था, हमने धान की फसल लगाने की कोशिश की लेकिन अब ये हाल है।”

किसानों ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति बहाल करने के लिए तेजी से कार्रवाई करने की अपील की है। किसानों ने ये भी कहा है कि अगर इसमें और देरी हुई तो इस सीजन की फसल को बचाना असंभव हो जाएगा। आपको बता दें कि, कश्मीर इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान दो दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

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