Ali Ahmed: अली अहमद के पास से मिले 1100 रु कैशAli Ahmed: अली अहमद के पास से मिले 1100 रु कैश

Ali Ahmed: अली अहमद के पास से मिले 1100 रु कैश

माफिया अतीक के बेटे अली अहमद से मिलने उसका वकील नैनी जेल पहुंचता है और तमाम सिक्योरिटी, सीसीटीवी, सुरक्षाकर्मी के बावजूद जेल प्रशासन से एक चूक हो जाती है, वकील अली अहमद को 1100 रुपये देता है अली अहमद बैरक में ही उन रुपये को गिनता हुआ भी दिखाई दिया है।

CCTV देखकर डीजी जेल ने तत्काल डीआईजी राजेश श्रीवास्तव को मामले की जांच करने और रिपोर्ट देने को कहा। लखनऊ से आदेश मिलते ही DIG राजेश श्रीवास्तव नैनी जेल पहुंचे। वहां अली की बैरक की जांच की गई, तो कैश मिला।

इसके बाद उन्होंने तुरंत हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा संभाल रहीं डिप्टी जेलर कांति देवी और जेल वॉर्डन संजय द्विवेदी को सस्पेंड कर दिया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए। डिप्टी जेलर कांति देवी बरेली जेल से 6 महीने पहले ही नैनी सेंट्रल जेल में आई थीं। वो 30 जून यानी 11 दिन बाद रिटायर होने वाली थीं, जबकि हेड वार्डर संजय द्विवेदी कंट्रोल रूम प्रभारी हैं।

आपको बता दें कि, अली ने 30 जुलाई, 2022 को प्रयागराज जिला कोर्ट में सरेंडर किया था। तब से वो नैनी जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में बंद है। अली, उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी है। नैनी जेल में लगे CCTV की मॉनिटरिंग डीजी जेल पीसी मीणा के ऑफिस से होती है।

लेकिन अब सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए माफिया अतीक के बेटे अली अहमद को नैनी सेंट्रल जेल की ‘फांसी घर’ वाली हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया है।
बैरक के अंदर और बाहर के पूरे रास्ते तक इतने CCTV लगे हैं कि, कोई ब्लैंक स्पॉट नहीं है। बैरक के बाहर 4 सुरक्षाकर्मी और नंबरदारों की ड्यूटी लगी है।

प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल के अंदर बने ‘फांसी घर’ में फांसी देने वाले बंदियों को एक दिन पहले लाकर बंद किया जाता था। इस ‘फांसी घर’ में कुल 14 लोगों को फांसी दी गई गई है। वही कई बार ऐसे कैदी, जो साथियों पर हंगामा करते हैं, उन्हें यहां बंद किया जाता है। अब इसी हाई सिक्योरिटी सेल में अली अहमद को रखा गया है।

इतना ही नहीं यहां आपको एक और विशेष बात की तरफ ध्यान दिलवाना चाहूंगी कि नैनी सेंट्रल जेल कभी माफिया अतीक-अशरफ का सबसे मुफीद पनाहगाह हुआ करती थी। योगी सरकार आने से पहले नैनी जेल में अतीक का दरबार लगता था। माफिया के लिए बैरक के बाहर किचन तैयार हुआ था, जहां डेग में खाना बनता था। सुबह से जेल परिसर के मशहूर चबूतरे पर अतीक बैठकर जनसुनवाई की तरह लोगों की समस्याएं सुनता था। जेल से ही फोन पर निर्देश जारी होते थे।

अब अतीक का दूसरे नंबर का बेटा अली जेल में कैश मिलने के मामले में फंसा है। अली और अन्य गैंग मेंबरों पर जेल में काफी सख्ती हुई, लेकिन वक्त गुजरने के साथ सेटिंग का खेल सामने आ ही गया।

जेल सोर्स के मुताबिक, अली और उसके करीबियों के लिए जेल कैंटीन में नाश्ते के लिए सबसे महंगा सामान मंगवाया जाता है। सिविल लाइन की सबसे महंगी बेकरी से ऑर्डर देकर जेल कैंटीन के लोग बिस्कुट, पापे समेत नाश्ते का अन्य सामान ले जाते थे। जेल कैंटीन में अतीक के करीबियों की उधारी एक महीने में 3 लाख तक पहुंच जाती है। ये रुपए अतीक गैंग के मेंबर पहुंचाते हैं। सामान जेल के अन्य बंदियों के नाम लिया जाता है, लेकिन पहुंचाया अली तक ही जाता है।

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