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12 जून, 2025 को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) उड़ान भरने के मात्र 30 सेकंड बाद रहस्यमय परिस्थितियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से 241 की मौत हो गई (169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 1 कनाडाई और 7 पुर्तगाली नागरिक शामिल)। इस भीषण त्रासदी के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह हादसा किसी दुश्मन देश द्वारा किया गया साइबर हमला था, जिसकी आशंका भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों पर हाल के साइबर अटैक्स के बाद और बढ़ गई है। राउत ने विमान के रखरखाव को लेकर भी आशंकाएं जताईं और जानना चाहा कि अहमदाबाद एयरपोर्ट का रखरखाव ठेका किसके पास है, बोइंग डील के समय भाजपा के विरोध के बावजूद यह डील कैसे पास हुई, और क्या रखरखाव में लापरवाही इसकी वजह बनी। उन्होंने मलबे के साथ मंत्रियों के “असंवेदनशील” रवैये की भी आलोचना की।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय बहु-विषयक जांच समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता गृह सचिव करेंगे और जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय वायु सेना तथा विमानन विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस समिति को फ्लाइट डेटा, ब्लैक बॉक्स (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर), एटीसी लॉग, विमान रखरखाव रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों तक पूर्ण पहुंच मिलेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य हादसे के मूल कारण का पता लगाना, आपातकालीन प्रतिक्रिया का आकलन करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाएं) बनाना है, जिसकी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर पेश की जाएगी।

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विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक विमानों की कंप्यूटराइज्ड प्रणालियां GPS स्पूफिंग, कॉकपिट कंट्रोल हैकिंग या मैलवेयर अटैक जैसे साइबर खतरों के प्रति संवेदनशील होती हैं, हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। दूसरी ओर, रखरखाव में कमी, तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि जैसे पारंपरिक कारण भी जांच के दायरे में हैं। इस हादसे ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ सरकार पारदर्शी जांच का दावा कर रही है, वहीं विपक्षी नेता संजय राउत के सवाल साइबर युद्ध और नीतिगत लापरवाहियों की ओर इशारा करते हैं। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए जांच समिति की रिपोर्ट अहम होगी, जिसमें साइबर सुरक्षा उपायों, रखरखाव प्रोटोकॉल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सुदृढ़ करने की सिफारिशें शामिल होंगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर जैसे उन्नत विमान की दुर्घटना विमानन उद्योग के लिए चिंता का विषय है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक साइबर हमले की अटकलों और रखरखाव की जवाबदेही को लेकर सवाल बने रहेंगे। सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि समिति किसी को दोषी ठहराने के बजाय सिस्टमेटिक सुधारों पर केंद्रित होगी, ताकि भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। इस बीच, इस घटना ने हवाई यात्रा को लेकर आम जनता में डर पैदा कर दिया है, जिसे दूर करने के लिए सरकार और एविएशन कंपनियों को मिलकर पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी।