बीकानेर: राजस्थान सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के प्रथम चरण से जुड़े किसानों के लिए बड़ी घोषणा की है। बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 60 साल पहले बनाए गए कच्चे और क्षतिग्रस्त खालों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने 790 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
सरकार के मुताबिक, इन खालों के पक्के होने से नहर के अंतिम छोर यानी टेल-एंड तक किसानों को पर्याप्त सिंचाई पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही पानी के रिसाव और बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा।
7 पैकेज में होगा खालों का पुनर्निर्माण
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता के अनुसार, खालों के जीर्णोद्धार के लिए 7 पैकेज तैयार किए गए हैं और सभी 7 कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है।
परियोजना पूरी होने के बाद करीब 1 लाख 51 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधे लाभ मिलने का दावा किया गया है। इससे तीनों जिलों के बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्धता हो सकेगी।
छह दशक पुराने खाले हो चुके थे जर्जर
इंदिरा गांधी नहर प्रणाली के इन खालों का निर्माण करीब छह दशक पहले हुआ था। लंबे समय तक इस्तेमाल और पर्याप्त रखरखाव नहीं होने के कारण कई जगह खाले क्षतिग्रस्त हो गए थे।
कई स्थानों पर फील्ड लाइनें टूट चुकी थीं और गहरे गड्ढे बन गए थे। इसके चलते नहर का पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही रिसकर बर्बाद हो जाता था। किसान लंबे समय से इन खालों के जीर्णोद्धार और उन्हें पक्का करने की मांग कर रहे थे।
पहले ही हो चुका है नहर सिस्टम का बड़ा काम
इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े मुख्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में पहले भी बड़ा काम पूरा किया जा चुका है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB की सहायता से 3,291.63 करोड़ रुपये की राजस्थान जल क्षेत्र पुन: संरचना परियोजना के तहत इंदिरा गांधी फीडर, 179.53 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर और 2,498.69 किलोमीटर के वितरण तंत्र की रिलाइनिंग का काम जुलाई 2026 में पूरा हो चुका है।
अब खालों के पुनर्निर्माण से सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
13 जिलों की जीवनरेखा है इंदिरा गांधी नहर
इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान के पश्चिमी हिस्से के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके प्रथम और द्वितीय चरण के जरिए वर्तमान में करीब 16.17 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हो रही है।
यह नहर पश्चिमी राजस्थान के 13 जिलों—हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी, चूरू, जोधपुर, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा और बाड़मेर—में करीब 2 करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके अलावा सूरतगढ़, रामगढ़, बरसिंगसर, गुढ़ा, गिरल और राजवेस्ट जैसी तापीय और गैस आधारित ऊर्जा परियोजनाओं को भी इसी नहर प्रणाली से पानी मिलता है।
किसानों को क्या फायदा होगा?
790 करोड़ रुपये की इस परियोजना का सबसे बड़ा असर सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। खालों के पक्के होने से पानी का रिसाव कम होगा और टेल-एंड तक पानी पहुंचाने में सुधार हो सकता है।
सरकार के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ की करीब 1.51 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा फायदा मिलेगा। इससे लंबे समय से जर्जर खालों की समस्या का समाधान करने और सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
