दिल्ली ब्लास्ट केस में NIA की बड़ी कार्रवाई
दिल्ली में पिछले महीने हुए आतंकवादी हमले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस मामले को बड़ी गंभीरता से देख रही है। सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में इस केस से जुड़े चार प्रमुख आरोपियों—डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल, मुफ्ती इरफान और डॉ. शाहीन सईद—को सख़्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया।
कोर्ट ने NIA की मांग मानते हुए इन सभी की हिरासत को चार दिनों के लिए और बढ़ा दिया है।
ये चारों आरोपी उस आतंकी साजिश का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जिसके चलते दिल्ली के व्यस्त इलाके में एक चलती हुई i20 कार में धमाका हुआ था। ये विस्फोट पिछले कुछ वर्षों में राजधानी में हुए सबसे गंभीर आतंकी हमलों में से गिना जा रहा है, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। इस घटना के बाद से ही केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
जांच एजेंसी के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि, मामले की परतें अभी भी खुल रही हैं, और कई ऐसे पहलू सामने आ रहे हैं, जिन्हें समझने और जोड़ने के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है। NIA का कहना है कि, ये चारों आरोपी आतंकी मॉड्यूल के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और इनके पास हमले की योजना, फंडिंग, तकनीकी मदद और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ी अहम जानकारी हो सकती है।

जांच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, “ये केस सिर्फ एक विस्फोट का नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का है। हमें हर उस व्यक्ति तक पहुंचना है जिसने इसमें सीधे या परोक्ष रूप से भूमिका निभाई हो।”
इससे पहले भी NIA ने इस मामले में कुछ अहम गिरफ्तारियां की थीं, जिनमें उमर उन नबी के छह करीबी सहयोगी भी शामिल थे। उमर को इस पूरी साजिश का मुख्य ऑपरेटर माना जा रहा है, जो विस्फोट में इस्तेमाल हुए बम बनाने में शामिल था।
इसी केस में एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी सोएब की हुई है, जिसकी रिमांड को विशेष अदालत ने दस दिनों के लिए और बढ़ा दिया था। बीते शुक्रवार को सोएब को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आंजू बजाज चंदना ने उसकी रिमांड बढ़ाने का आदेश दिया।
NIA का आरोप है कि, सोएब ने न केवल उमर उन नबी को छिपने की जगह दी, बल्कि हमले से पहले उसकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी मदद की। एजेंसी के अनुसार, सोएब ने उमर को आतंकी हमले के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स, मूवमेंट और ठिकानों की व्यवस्था भी कराई थी।
NIA का मानना है कि, सोएब की गिरफ्तारी से इस पूरे मॉड्यूल के ऑपरेशन को समझने में बड़ी मदद मिली है। जांच टीम का कहना है कि, सोएब और उमर के बीच लगातार संपर्क के सबूत मिले हैं और कई डिजिटल डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
सोएब से जुड़ी पिछली सुनवाई बंद अदालत कक्ष में हुई थी, जहां मीडिया और आम लोगों को अनुमति नहीं थी। अधिकारियों ने बताया कि, केस की संवेदनशीलता के कारण ये कदम उठाया गया।
कोर्ट परिसर में पुलिस, CRPF और स्पेशल सेल की टीमें चौकन्नी नजर आईं। अदालत में पेश किए गए सभी आरोपियों को सुरक्षा घेरे में लाया गया और सुनवाई खत्म होने के बाद सीधे NIA टीम की निगरानी में वापस ले जाया गया।
NIA लगातार ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, इस हमले के पीछे मास्टरमाइंड कौन था, फंडिंग कहां से आई, और स्थानीय नेटवर्क किस तरह सक्रिय था। एजेंसी को शक है कि, ये हमला किसी बड़े विदेशी संगठन की प्रेरणा या समर्थन से किया गया हो सकता है।
फिलहाल NIA ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मैसेजिंग रिकॉर्ड, फंडिंग ट्रेल और संदिग्ध यात्राओं का डेटा कब्जे में ले लिया है। इन सभी की फॉरेंसिक जांच चल रही है।
चारों आरोपियों की रिमांड बढ़ने से NIA को उनकी भूमिका, संपर्कों और हमले की तैयारी से जुड़े पहलुओं पर और गहराई से पूछताछ करने का अवसर मिलेगा। आने वाले दिनों में एजेंसी कई और गिरफ्तारियां कर सकती है।

