लखनऊ: ‘कारगिल विजय दिवस’ पर बोले CM योगीलखनऊ: ‘कारगिल विजय दिवस’ पर बोले CM योगी

लखनऊ: ‘कारगिल विजय दिवस’ पर बोले CM योगी

लखनऊ में आयोजित कारगिल विजय दिवस समारोह के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलवामा हमले और भारत की सैन्य प्रतिक्रिया को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान ने पुलवामा में हमारे 22 जवानों को मारा, लेकिन भारत की सेना ने पूरे पाकिस्तान को सबक सिखाने में 22 मिनट भी नहीं लगाए।

ये कार्यक्रम कारगिल शहीद स्मृति वाटिका में आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया और भारत की सैन्य शक्ति, अखंडता और राष्ट्रीयता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कारगिल युद्ध के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि, हमारे सैनिकों ने कभी पलायन नहीं किया। ये ही वजह थी कि भारत ने कारगिल की पहाड़ियों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने कहा, “जो पलायन करता है, उसे सफलता नहीं मिलती। समाज में जो विद्वेष फैलाते हैं, उन्हें भी सफलता नहीं मिलती। सफलता वही पाता है जो चुनौतियों का सामना करता है।”

योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को पलायनवादी सोच से बचने की सलाह दी और कहा कि उन्हें कठिनाइयों का डटकर सामना करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पुलवामा हमले की चर्चा करते हुए कहा कि, “पाकिस्तान ने जब हमारे 22 जवानों की जान ली, तो भारत की सेना ने 22 मिनट में पूरा हिसाब चुकता कर दिया।” ये बयान उनके द्वारा देश की सेना की तत्परता और शक्ति को रेखांकित करने के लिए दिया गया।

हालांकि उन्होंने सीधे सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से उस सैन्य कार्रवाई की ओर था जिसे पुलवामा हमले के बाद अंजाम दिया गया था।

कार्यक्रम में मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री योगी और लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। सम्मानित किए गए शहीदों में कैप्टन मनोज पांडेय, लांस नायक केवलानंद द्विवेदी, रायफल मैन सुनील जंग और मेजर रितेश शर्मा शामिल रहे।

मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने से पहले स्थानीय छात्राओं ने “बेटी हिंदुस्तान की” गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिससे माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को विशेष रूप से याद किया और कहा कि कारगिल विजय की घोषणा भी वाजपेयी जी ने ही की थी। उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तान ने घुसपैठ की, तो सेना ने सरकार को सूचित किया। प्रधानमंत्री ने कार्रवाई की, लेकिन किसी दबाव में नहीं आए।”

योगी ने आगे कहा, “उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति अमेरिका गए थे, लेकिन वाजपेयी जी ने देश की अस्मिता से कोई समझौता नहीं किया। अंततः दुश्मनों को आत्मसमर्पण करना पड़ा।”

सीएम योगी ने अपने भाषण में राष्ट्रहित के नाम पर उन ताकतों की आलोचना की जो, उनके अनुसार, देश को जाति, धर्म या भाषा के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, “भारत कभी बल, बुद्धि और विद्या में कमजोर नहीं रहा। पर कुछ लोग जो भारत को समर्थ और सशक्त नहीं देखना चाहते, वे जाति के नाम पर विद्वेष फैलाते हैं।”

उन्होंने ऐसे नेताओं और दलों पर निशाना साधा जो नागरिकों से अधिक घुसपैठियों की चिंता करते हैं। योगी ने कहा कि, भारत को गुलाम बनाने में ऐसे ही विभाजनकारी तत्वों की भूमिका थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, ये सिर्फ कारगिल विजय का दिन नहीं है, बल्कि लखनऊ के लिए गर्व का क्षण भी है। उन्होंने कहा कि, “लखनऊ को स्वच्छता सर्वेक्षण में तीसरी रैंक मिली है। ये प्रदेश और शहर के नागरिकों के लिए सम्मान की बात है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ये भाषण न केवल देशभक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा को केंद्र में रखकर दिया गया, बल्कि उन्होंने इसे आंतरिक राजनीतिक मुद्दों से भी जोड़ा। उनके भाषण में एक ओर जहां कारगिल युद्ध के शहीदों की वीरता को सलामी थी, वहीं दूसरी ओर आज के राजनीतिक और सामाजिक हालात पर तीखा संदेश भी था।

कारगिल विजय दिवस का ये आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि भारत के लिए अखंडता, स्वाभिमान और सैन्य गौरव किसी भी दलगत राजनीति से ऊपर है। मुख्यमंत्री का ये भाषण उसी राष्ट्रीय भावना को दोहराता है जो 1999 में कारगिल की चोटियों पर लिखी गई थी – “जय हिंद, जय भारत।”