जयपुर। राजस्थान समेत देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर उठे विवाद के बीच अब चुनाव आयोग ने स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे, मतदाता सूची में दर्ज गलतियों को सुधारा जाएगा और नियमानुसार अपात्र नाम हटाए जाएंगे। खास बात यह है कि 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
राजस्थान में 31 लाख से ज्यादा नाम कटने पर हुआ था विवाद
राजस्थान में हाल ही में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान 31 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा के इशारे पर फर्जी आवेदन के जरिए विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम हटवाए गए। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सामाजिक संगठनों ने भी मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। अब चुनाव आयोग के नए अभियान से उन पात्र नागरिकों को दोबारा आवेदन करने का अवसर मिलेगा, जिनके नाम किसी कारण से मतदाता सूची में नहीं हैं।
राजस्थान में 14 दिनों में आए 4.80 लाख से ज्यादा आवेदन
राजस्थान में नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
14 अक्टूबर तक प्रदेश में फॉर्म-6 के माध्यम से कुल 4,80,893 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इनमें 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 2,67,946 आवेदन शामिल हैं, जबकि 20 वर्ष की आयु वर्ग से 2,12,947 आवेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि, आवेदन प्राप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी नाम मतदाता सूची में शामिल हो चुके हैं। पंजीकरण नियमानुसार जांच और स्वीकृति के बाद होगा।
कब जारी होगी नई वोटर लिस्ट? जानिए पूरा कार्यक्रम
चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया नवंबर से आगे बढ़ेगी।
तारीख और महत्वपूर्ण प्रक्रिया
12 नवंबर 2026: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन
12 नवंबर–11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय
4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
इस दौरान मतदाता अपना नाम जांच सकेंगे और आवश्यक सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।
18 साल के युवाओं के लिए क्या है खास?
चुनाव आयोग ने 1 जनवरी 2027 को मतदाता पंजीकरण की मुख्य पात्रता तिथि निर्धारित किया है। इसके अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को भी अग्रिम आवेदन करने की सुविधा दी जाएगी।
इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया समय रहते पूरी करने में मदद मिलेगी।
कैसे जुड़वाएं वोटर लिस्ट में अपना नाम?
मतदाता घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाना होगा।
– फॉर्म-6: नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए।
– फॉर्म-7: किसी नाम को हटाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
– फॉर्म-8: नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार और निर्धारित बदलावों के लिए।
आवेदन के लिए आवश्यक पहचान, आयु और पते से जुड़े दस्तावेज संबंधित फॉर्म के निर्देशों के अनुसार देने होंगे। नागरिक अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या निर्वाचन कार्यालय से भी सहायता ले सकते हैं।
राजस्थान समेत किन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा अभियान?
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, बिहार, असम, गोवा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में यह अभियान चलाया जाएगा।
पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर भी उठे सवाल
राजस्थान में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों से भी जुड़ गया है।
मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने सवाल उठाया है कि जब SIR के दौरान लाखों नाम हटाए गए हैं, तो स्थानीय निकाय चुनावों में पुरानी मतदाता सूची का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
सामाजिक संगठनों की मांग है कि चुनावों में पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। हालांकि, स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची और उसके उपयोग से जुड़े निर्णय संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों और कार्यक्रम के अनुसार होंगे।
SIR और SSR में क्या अंतर है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में मतदाता सूची का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। वहीं SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन में मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट करने, नए नाम जोड़ने, त्रुटियां सुधारने और अपात्र नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
SSR में सामान्य तौर पर आवेदन और दावे-आपत्तियों के आधार पर संशोधन किए जाते हैं, जबकि SIR में घर-घर जाकर सत्यापन जैसी व्यापक प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चुनाव आयोग का यह नया अभियान राजस्थान में मतदाता सूची से जुड़े विवादों को खत्म कर पाएगा? और क्या सभी पात्र मतदाताओं को समय रहते सूची में शामिल किया जा सकेगा?
फिलहाल, जिन नागरिकों का नाम मतदाता सूची में नहीं है या जिनके विवरण में कोई गलती है, उनके लिए यह अभियान महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
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