उत्तर प्रदेश

मौलाना रशीदी के बयान से आया सियासी भूचाल, ओपी राजभर ने किया अखिलेश पर तीखा ‘वार’, कहा- “शादी का धर्म निभाए, पत्नी का साथ दें”

मौलाना रशीदी के बयान से आया सियासी भूचाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों फिर से गर्माई हुई है, और इस बार मामला है, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव पर की गई एक टिप्पणी का। ये टिप्पणी ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने की थी, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मामला तब और बढ़ गया जब लाइव टीवी डिबेट के दौरान मौलाना पर हमला हो गया। अब इस विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी एंट्री ले ली है, और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जुबानी हमला बोला है।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर सवाल उठाते हुए कहा कि, जब किसी की शादी होती है तो सात वचन निभाने का वादा होता है। जब पत्नी पर आफत आती है, तो पति का धर्म है कि, वो उसके साथ खड़ा हो। लेकिन अखिलेश यादव “पति का धर्म” नहीं निभा रहे, बल्कि वोट बैंक की राजनीति करते हुए मौलाना के साथ खड़े हैं।

राजभर ने आगे कहा कि, “पूरी NDA सरकार मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ है। NDA महिलाओं के सम्मान में विश्वास रखती है। बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में नारी सम्मान का प्रावधान दिया है।” उन्होंने ये भी कहा कि, अगर मौलाना रशीदी इतने बड़े धार्मिक व्यक्ति हैं, तो उन्हें ये बताना चाहिए कि, मस्जिद में महिलाओं की क्या भूमिका होनी चाहिए, लेकिन इस तरह की अभद्र टिप्पणी बिल्कुल अस्वीकार्य है।

पूरा विवाद तब और गहरा गया जब मौलाना साजिद रशीदी नोएडा के एक न्यूज चैनल के लाइव डिबेट में पहुंचे। वहीं पर सपा के युवा नेता और समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव कुलदीप भाटी ने मौलाना को कई थप्पड़ जड़ दिए। जिसके बाद मौलाना ने सेक्टर-126 थाने में तहरीर देकर तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। दूसरी ओर, न्यूज चैनल की ओर से भी तहरीर दी गई है, जिसमें मौलाना सहित कुलदीप भाटी, मोहित नागर और श्याम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

ADCP सुमित शुक्ला ने मीडिया को बताया कि, चैनल की तहरीर के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

इस घटना पर सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ‘X’ पर लिखा,
“मैं हिंसा का बिल्कुल भी समर्थक नहीं हूं। लेकिन, असभ्य, जंगली और बेहूदे मौलाना का पिटना मुझे कतई खराब नहीं लगा। बहनों और बेटियों पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले हर बदतमीज़ का यही हश्र होना चाहिए।”

राजकुमार भाटी के इस पोस्ट से स्पष्ट है कि पार्टी के अंदर मौलाना के बयान को लेकर नाराजगी है, लेकिन हमला करने की सार्वजनिक सराहना करना सपा की छवि को विवादित बना सकता है।

विवाद की शुरुआत 22 जुलाई को हुई, जब डिंपल यादव अपने पति अखिलेश यादव के साथ दिल्ली की एक मस्जिद में एक बैठक में शामिल होने पहुंचीं। उसी दिन एक चैनल के डिबेट में मौलाना साजिद रशीदी ने डिंपल यादव के कपड़ों और मस्जिद में उनके व्यवहार को लेकर अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि, डिंपल यादव ने मस्जिद की पवित्रता की तौहीन की है, क्योंकि उन्होंने सिर नहीं ढका था और उनका पहनावा इस्लामी और भारतीय संस्कृति दोनों के खिलाफ था।

उन्होंने डिंपल से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की, जिससे मामला और गरमा गया।

मौलाना के बयान पर सपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों में भी गुस्सा देखा गया। सपा नेता कुलदीप भाटी ने बयान में कहा,
“मैं गुर्जर समाज से आता हूं। हमारी बहन-बेटियों पर कोई भी अभद्र टिप्पणी करेगा तो उसका यही हश्र होगा। हमने मौलाना का इलाज कर दिया है।”

हालांकि, मंत्री राजभर ने हमला करने को गलत बताया और कहा कि “देश और प्रदेश में कानून का राज है। किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।”

इस मामले में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी बयान देते हुए कहा कि, मस्जिद में नेताओं का जाना, विशेषकर “हिंदू नेताओं” का जाना, गलत है। उन्होंने डिंपल यादव पर मस्जिद की गरिमा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

ये पूरा प्रकरण अब केवल मौलाना बनाम सपा कार्यकर्ता का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि ये नारी सम्मान, धर्म की राजनीति और सांप्रदायिक संतुलन जैसे बड़े सामाजिक मुद्दों से जुड़ गया है। एक ओर जहां मौलाना रशीदी की टिप्पणी की आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर सपा कार्यकर्ताओं की हिंसा को भी गलत बताया जा रहा है।

Kirti Bhardwaj

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