मुजफ्फरनगर में दंगों की साजिश हुई नाकाममुजफ्फरनगर में दंगों की साजिश हुई नाकाम

मुजफ्फरनगर में दंगों की साजिश हुई नाकाम

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने सावन के दूसरे सोमवार को कांवड़ यात्रा के दौरान एक बड़े सांप्रदायिक दंगे की साजिश को विफल कर दिया है। पुलिस ने सोमवार को इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो एक भ्रामक और भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे थे। इस वीडियो के साथ एक फर्जी ऑडियो जोड़कर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। पुलिस का दावा है कि इस साजिश के पीछे आतंकवादी मानसिकता और विदेशी साजिश की झलक मिल रही है।

पुलिस के अनुसार, वायरल किया गया वीडियो पाकिस्तान के मिफ्फरीध जनपद का है, जिसमें एक व्यक्ति अपनी पत्नी और सात बच्चों की हत्या करता हुआ नजर आता है। ये वीडियो पाकिस्तान में हुई साल 2024 की एक सच्ची घटना से जुड़ा है। लेकिन आरोपियों ने इस वीडियो को भारत के मुरादाबाद जिले के मंसूरपुर गांव का बताते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके साथ जोड़कर एक भड़काऊ ऑडियो भी शेयर किया गया, जिसमें कहा गया कि बजरंग दल के लोग मुस्लिमों के घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों की हत्या कर रहे हैं।

ऑडियो में दावा किया गया कि 50 से अधिक मुस्लिमों की हत्या हो चुकी है और कई गांवों में मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। साथ ही, लोगों से इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की गई थी।

पुलिस जांच में सामने आया है कि, ये वीडियो महज अफवाह नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस का मानना है कि इसका उद्देश्य दंगे फैलाकर हालात को इतना खराब करना था कि उसमें “लोन वोल्फ” जैसे आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया जा सके। DIG सहारनपुर रेंज, अभिषेक सिंह ने कहा कि, ये देश की आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ गहरी साजिश है और इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

DIG के अनुसार, इस साजिश में कुछ असामाजिक तत्व, राष्ट्रविरोधी संगठन और आतंकी नेटवर्क भी जुड़े हो सकते हैं। इस पूरे मामले की जांच गहराई से की जा रही है और अन्य जिलों व राज्यों में छापेमारी भी की जा रही है।

इस मामले में थाना ककरौली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें नदीम, मंशर और रहीस नाम के युवक शामिल हैं। ये सभी मुजफ्फरनगर जिले के ककरौली गांव के निवासी हैं और 5वीं कक्षा तक ही पढ़े हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें इस वीडियो की सच्चाई का अंदाजा नहीं था और वे इसे “मुरादाबाद की घटना” बताकर जानबूझकर वायरल कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनमें वीडियो और ऑडियो पाए गए हैं। उनके खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

DIG अभिषेक सिंह ने बताया कि, पुलिस ने उन चार वॉट्सऐप ग्रुपों की पहचान की है, जिन पर ये वीडियो शेयर किया गया था। इन ग्रुपों में सैकड़ों सदस्य शामिल हैं। इनमें से कई सदस्य पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों के हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इन ग्रुपों के आधार पर नेटवर्क का विस्तार समझने की कोशिश कर रही है।

साजिशकर्ताओं ने जानबूझकर सावन महीने के सोमवार को इस वीडियो को वायरल किया, क्योंकि ये वो समय है जब लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं। पश्चिमी यूपी में इस समय धार्मिक भावना चरम पर होती है और इसे ध्यान में रखते हुए वीडियो के माध्यम से दंगे भड़काने की कोशिश की गई।

पुलिस के मुताबिक, ये एक ‘ट्रिगर पॉइंट’ बनाने की साजिश थी, जिसमें धार्मिक भावनाएं भड़काकर समाज में विभाजन और हिंसा फैलाई जा सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और वीडियो को वायरल करने वाले आरोपियों को पकड़ लिया। साथ ही, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को हटवाने के लिए संबंधित प्लेटफॉर्म्स से संपर्क किया गया है। साइबर सेल भी इस मामले में जांच कर रही है कि, वीडियो सबसे पहले कहां से और किस डिवाइस से अपलोड किया गया था।

DIG अभिषेक सिंह ने कहा, “ये एक बड़ी आतंकवादी साजिश का हिस्सा हो सकता है। लोन वोल्फ अटैक की तैयारी थी। सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर समाज में जहर घोलने की कोशिश हो रही थी। इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”