बस्तर दशहरा की पहली रस्म ‘पाट जात्रा’ संपन्न, शुरू हुआ ऐतिहासिक पर्व का आगाज

बस्तर.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत हो गई है। हरेली अमावस्या के मौके पर बुधवार 12 अगस्त को जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में बस्तर दशहरा की पहली और महत्वपूर्ण रस्म पाट जात्रा विधि-विधान के साथ पूरी की गई।

इसी के साथ करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस अनोखे पर्व की औपचारिक शुरुआत हो गई है। पाट जात्रा के दौरान मंदिर परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और बस्तर की सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। अब आने वाले दिनों में बस्तर दशहरा की अन्य महत्वपूर्ण रस्में भी क्रमवार पूरी की जाएंगी।

600 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम
बस्तर दशहरा को देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले दशहरा पर्वों में गिना जाता है। करीब 600 साल पुरानी यह परंपरा आज भी अपनी मूल संस्कृति और रीति-रिवाजों के साथ निभाई जा रही है। इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि यहां दशहरा सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं होता, बल्कि करीब 75 दिनों तक अलग-अलग पारंपरिक रस्मों के साथ चलता है। इस दौरान 12 से ज्यादा प्रमुख रस्में निभाई जाती हैं, जो बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ी हुई हैं।

पाट जात्रा के बाद शुरू होगा रस्मों का सिलसिला
पाट जात्रा पूरी होने के साथ ही अब बस्तर दशहरा पर्व की आगे की रस्मों का सिलसिला शुरू होगा। आने वाले दिनों में अलग-अलग पारंपरिक अनुष्ठान पूरे किए जाएंगे। हर रस्म का अपना अलग महत्व है और इनके जरिए बस्तर की सदियों पुरानी परंपराएं आज भी नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। यही वजह है कि बस्तर दशहरा देश के दूसरे दशहरा आयोजनों से काफी अलग माना जाता है।

देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक
बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं को देखने के लिए हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग बस्तर पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटक भी इस पर्व की पारंपरिक रस्मों और यहां की संस्कृति को करीब से देखने में रुचि रखते हैं। पर्व के दौरान होने वाले पारंपरिक आयोजन बस्तर की जनजातीय संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं की अलग तस्वीर पेश करते हैं। यही वजह है कि बस्तर दशहरा को देखने के लिए लोगों में खास उत्साह रहता है।

आयोजन के लिए बनाई जाती है विशेष समिति
करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस बड़े आयोजन को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष समिति का गठन किया जाता है। यह समिति पर्व की अलग-अलग रस्मों और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालती है। प्रशासन की कोशिश रहती है कि सदियों पुरानी परंपराओं को उसी मूल स्वरूप में आगे बढ़ाया जाए और आयोजन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

विश्व धरोहर में शामिल कराने की तैयारी
बस्तर दशहरा को अब विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के मुताबिक, करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस विश्व प्रसिद्ध पर्व को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कराने के लिए पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बस्तर दशहरा को विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो यह बस्तर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए गौरव की बात होगी।

आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम
बस्तर दशहरा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की संस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत स्वरूप भी है। इसकी अलग-अलग रस्मों में स्थानीय परंपराओं और जनजीवन की झलक देखने को मिलती है। पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ यह 75 दिवसीय पर्व अब अगले कई सप्ताह तक अलग-अलग पारंपरिक रस्मों के साथ आगे बढ़ेगा। बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाला यह पर्व एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है।

Rupesh Jha

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