दिल्ली बनेगी कूटनीति का केंद्र !
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की जल्द ही भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की तैयारियां भी चल रही हैं। यानी आने वाले महीनों में दिल्ली कूटनीति का बड़ा केंद्र बन सकती है। यूक्रेन को इस दौरे से बड़ी उम्मीदें हैं।
भारत रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस की एक वजह भारत और रूस के दशकों पुराने दोस्ताना रिश्ते है। यूक्रेन को भरोसा है कि ऐसे में अगर भारत पहल करता है तो मॉस्को भी बातचीत से इनकार नहीं कर पाएगा।
दरअसल रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुए ढाई साल से ज्यादा समय हो चुका है। हजारों जानें गईं, लाखों लोग विस्थापित हुए और यूरोप समेत पूरी दुनिया इसकी आंच महसूस कर रही है। ऐसे में यूक्रेन को भारत से इस भी उम्मीद है क्योंकि भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक हैं। रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे रिश्ते हैं।
यूक्रेन ये भी जानता है कि भारत हमेशा मॉस्को का भरोसेमंद साथी रहा है। यही वजह है कि यूक्रेन मानता है कि भारत के कहने पर रूस बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो सकता है।
भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने हाल ही में कहा कि “हम यूक्रेन में शांति प्रक्रिया में भारत की अधिक भागीदारी की उम्मीद करते हैं। भारत केवल तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति, कूटनीति और संवाद का दृढ़ समर्थक है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि 2023 से भारत और यूक्रेन के बीच बातचीत और संवाद काफी बढ़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की कई बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मिले हैं और दोनों नेताओं की बातचीत भविष्य में भी जारी रहने वाली है।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध शुरू होने के बाद कई बार दोनों पक्षों से कहा कि “यह समय युद्ध का नहीं है, बल्कि कूटनीति का है।” इस बयान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हुई। पश्चिमी देशों ने भी माना कि भारत जैसे उभरते हुए लोकतंत्र और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश की राय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत ने अब तक युद्ध में किसी पक्ष का खुला समर्थन नहीं किया है। उसने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा, लेकिन यूक्रेन को मानवीय मदद भी भेजी। यही संतुलित नीति भारत को एक ऐसे मध्यस्थ की भूमिका देती है, जिस पर दोनों पक्ष भरोसा कर सकते हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर विचार साझा किए। यह दर्शाता है कि भारत लगातार शांति प्रयासों में सक्रिय है।
बता दे कि जेलेंस्की की भारत यात्रा की खबर उस समय सामने आई है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी जल्द भारत आ सकते हैं। अगर दोनों नेता लगभग एक ही समय में भारत आते हैं, तो यह अपने आप में ऐतिहासिक होगा। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस संघर्ष को खत्म करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
हाल ही में अलास्का में पुतिन और ट्रंप की मुलाकात हुई, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। यूक्रेन ने भी इस बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह रूस की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। राजदूत पोलिशचुक ने साफ कहा“अमेरिका हमारा बड़ा समर्थक है, लेकिन अंततः यह रूस पर निर्भर करता है कि वह बातचीत के लिए कितनी गंभीरता दिखाता है।”
यूक्रेन को भारत पर भरोसा इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि 2023 से दोनों देशों के बीच संवाद में तेजी आई है। कई बार दोनों देशों के नेता आमने-सामने या वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर मिले हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर स्पष्ट कहा है कि भारत “शांति, संवाद और कूटनीति” का समर्थन करता है।
इसके अलावा, यूक्रेन ये भी मानता है कि रूस भारत की बात सुनता है। रूस की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का गहरा असर पड़ा है। ऐसे में भारत के साथ बढ़ता व्यापार और ऊर्जा सहयोग रूस के लिए राहत का काम करता है। यही कारण है कि अगर भारत मॉस्को से कहेगा, तो पुतिन बातचीत से इनकार नहीं कर पाएंगे।

