कांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबों और होटलों पर QR कोडकांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबों और होटलों पर QR कोड

कांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबों और होटलों पर QR कोड

कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालयों और ढाबों में क्यूआर कोड लगाने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, वो इस समय केवल एक सीमित आदेश पारित कर रही है, जिसके तहत सभी होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स को अपने वैध लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने होंगे।

ये आदेश न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसे शिक्षाविद अपूर्वानंद झा और अन्य ने दाखिल किया था। याचिका में योगी सरकार के उस निर्देश पर आपत्ति जताई गई थी, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों पर QR कोड और मालिक की पहचान प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा,
“हमें बताया गया है कि आज कांवड़ यात्रा का अंतिम दिन है और ये यात्रा समाप्त होने के करीब है। ऐसे में फिलहाल हम केवल इतना निर्देश दे सकते हैं कि, सभी संबंधित होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट के मालिक वैधानिक जरूरतों के अनुसार अपने लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करें।”

कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि, वर्तमान में क्यूआर कोड और मालिक की पहचान से जुड़े पहलुओं पर चर्चा नहीं की गई है, और इन मुद्दों पर याचिका में उठाई गई आपत्तियों पर बाद में विचार किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, उत्तर प्रदेश सरकार की 25 जून की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि, कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य है। इससे ढाबा या होटल मालिक की पहचान और अन्य विवरण आम लोगों के सामने आ जाते हैं।

याचिका में ये भी कहा गया कि, ये आदेश व्यक्तिगत निजता के अधिकार का उल्लंघन है और इसका उद्देश्य धार्मिक या जातिगत प्रोफाइलिंग करना हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि, ये नियम चुनिंदा समुदायों को लक्षित करता है, जो सुप्रीम कोर्ट की पूर्ववर्ती टिप्पणियों और आदेशों के खिलाफ है।

ये उल्लेखनीय है कि, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकारों के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें कांवड़ मार्ग पर ढाबा मालिकों के नाम, धर्म और कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने उस समय इसे भेदभावपूर्ण प्रोफाइलिंग बताते हुए खारिज किया था।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि, QR कोड और दस्तावेजों का उद्देश्य केवल “यात्रा के दौरान सुरक्षा” और “प्रशासनिक निगरानी” है। इसके जरिए ये सुनिश्चित किया जा सकेगा कि, अवैध रूप से संचालित दुकानें, ढाबे या भोजनालय सक्रिय न हों और कोई असामाजिक तत्व कानून-व्यवस्था को बाधित न कर सके।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि QR कोड लगाने या मालिक की पहचान उजागर करने पर कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है। कोर्ट ने इस मुद्दे को अगली सुनवाई के लिए छोड़ते हुए केवल ये आदेश पारित किया कि, कानून के मुताबिक रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और अन्य वैध दस्तावेज प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।