उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेताओं ने बिताई रात
विधानसभा के विभिन्न सत्रों के दौरान आपने विपक्षी पार्टियों का धरना तो अवश्य ही देखा होगा। सत्र के दौरान जमकर बयानबाजी भी देखी होगी, यूपी में 24 घंटे लगातार चलने वाला सत्र भी देखा होगा लेकिन जो आपने नहीं देखा होगा वो भी आपको उत्तराखंड में देखने को मिल गया है और वो है विपक्षी विधायकों का विधानसभा के भीतर ही पूरी रात रूकना और रोष प्रदर्शन करना।
उत्तराखंड की राजनीति में ये एक अभूतपूर्व घटनाक्रम है राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर ही धरना शुरू कर दिया और पूरी रात वहीं गुजारने का फैसला किया। इस तरह का यह पहला मौका था जब विपक्ष के नेता विधानसभा के अंदर ही धरने पर बैठे और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी का खुलकर प्रदर्शन किया।
गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मंगलवार को शुरू हुए मानसून सत्र के पहले दिन ही सदन में भारी हंगामा भी देखने को मिला। विपक्ष ने कार्यवाही के समय में विस्तार और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नियम 310 के तहत चर्चा की मांग की। खासतौर पर नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के साथ हुई धक्का-मुक्की को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब चाहता था।
लेकिन सत्तारूढ़ पक्ष ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कार्यवाही चलाने का फैसला लिया, जिससे नाराज होकर कांग्रेस के विधायकों ने विरोध स्वरूप माइक उखाड़ दिए और टेबल पलट दी। इस हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का यह विरोध यहीं नहीं थमा। कांग्रेस के विधायक सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए और पूरी रात वहीं गुजारने की घोषणा कर दी। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कई प्रयास किए गए ताकि विधायक मान जाएं और सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चल सके।
मुख्यमंत्री धामी ने खुद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को फोन किया और उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने साफ कहा कि जब तक कानून व्यवस्था पर नियम 310 के तहत चर्चा नहीं होती और सत्र की अवधि नहीं बढ़ाई जाती, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
इस विरोध में कांग्रेस के सभी 19 विधायक शामिल रहे। उनके साथ निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने भी साथ दिया। उमेश कुमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष एकजुट है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
इस घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए कहा, “जहाँ भी कांग्रेस चुनाव हारती है, वहाँ उसका हंगामा करना तय हो जाता है। लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करने के बजाय इस पार्टी ने बहानेबाज़ी और बवाल खड़ा करना ही अपनी नीति बना लिया है। जनता के स्पष्ट जनादेश को नकारकर भारत के लोकतंत्र का अपमान करना ही कांग्रेस की सबसे बड़ी आदत बन चुकी है।”
मुख्यमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से पलटवार भी किया गया। पार्टी ने इसे जनभावनाओं की अनदेखी बताया और कहा कि जनता की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और लोकतंत्र की गरिमा को बचाने के लिए उनका यह विरोध जरूरी था। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन चर्चा और संवाद का मंच होता है, लेकिन जब विपक्ष की आवाज दबाई जाती है, तब विरोध स्वाभाविक है।
वही धरने का दूसरा दिन बुधवार को उस समय और चर्चा में आ गया जब मुख्यमंत्री धामी सुबह-सुबह जनता दर्शन के लिए निकल पड़े। उन्होंने आम लोगों से मिलकर विकास कार्यों और प्रशासन की स्थिति का फीडबैक लिया। इस दौरान वे सुरक्षा कर्मियों से भी मिले और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

