उत्तराखंड की राजनीति में उठापटक तेज़!उत्तराखंड की राजनीति में उठापटक तेज़!

उत्तराखंड की राजनीति में उठापटक तेज़!

उत्तराखंड में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां तेज़ी से बदल रही हैं। आपदाओं से लेकर विधानसभा सत्र तक और दिल्ली में हुई बीजेपी नेताओं की बैठकों से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों तक, राज्य की राजनीति में हलचल साफ तौर पर देखी जा सकती है।

हाल ही में उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस के आक्रामक रुख, पंचायत चुनावों में गड़बड़ी के आरोप और नैनीताल में अराजकता के हालात ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। वहीं, इन सबके बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दिल्ली दौरा और वहां बीजेपी के बड़े नेताओं की बैठकों से सियासी चर्चाएं और भी गर्म हो गई हैं।

दिल्ली में हुई बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी बैठक में शामिल नहीं हुए, और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बैठक में सिर्फ कुछ समय के लिए आए और चले गए। इन दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी और तत्काल वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर कई अटकलें शुरू हो गईं।

हालांकि, अगले ही दिन प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम के साथ अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र रावत की एक साझा तस्वीर सामने आई, जिससे इन कयासों को विराम देने की कोशिश की गई। पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि, बलूनी और रावत दोनों पहले दिन उपलब्ध नहीं थे। रावत अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आगे के कार्यक्रमों में चले गए थे और इस बात को सोशल मीडिया पर गलत ढंग से पेश किया गया।

दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सबसे पहले देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित एशियन ओपन आइस स्केटिंग चैंपियनशिप के समापन कार्यक्रम में पहुंचे। इसके बाद वे सीधे आपदा कंट्रोल रूम गए, जहां उन्होंने उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और अन्य क्षेत्रों में आई आपदाओं को लेकर समीक्षा की और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

मीडिया से बातचीत में जब धामी से दिल्ली दौरे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि “दिल्ली में सबकुछ अच्छा है।” उन्होंने बताया कि, इस दौरे में उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। उत्तराखंड में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय और अन्य खेल सुविधाओं को लेकर मंत्री से सहयोग का अनुरोध किया गया।

इसके अलावा, सीएम धामी ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में आरडीएसएस योजना के तहत 500 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है, जबकि हरिद्वार में बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करने की योजना को भी स्वीकृति मिल गई है। ये खासकर आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर बेहद जरूरी माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी भेंट की और उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई आपदा के कारण गंगोत्री हाईवे पर हुए नुकसान की जानकारी साझा की। उन्होंने अनुरोध किया कि हाईवे की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री से जब कैबिनेट विस्तार को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “चर्चाएं चल रही हैं, पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से विचार करती है और सभी से फीडबैक के आधार पर निर्णय लेती है।” इस बयान के साथ ही एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है।

उत्तराखंड में 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल का प्रावधान है, जिसमें अभी 2 पद खाली हैं। कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद ये पद रिक्त हो गए हैं। दोनों के पास महत्वपूर्ण विभाग थे — उद्योग, वित्त और हाउसिंग — जो फिलहाल मुख्यमंत्री के पास हैं।

राज्य में कुल 72 विभाग हैं, जिनमें से करीब 40 विभागों की जिम्मेदारी अकेले मुख्यमंत्री के पास है। ऐसे में एक तरफ प्रशासनिक कार्यभार असंतुलित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर कई विधायकों में असंतोष और उम्मीदें भी देखी जा रही हैं।